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Conflict Story: Malathi Krishnamurthy Holla Hindi


Conflict Story: Malathi Krishnamurthy Holla

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हमलोग अपने जीवन में इतना व्यस्त हो गए हैं की अपनी कठिनाइयों को और से बड़ा समझने लग जाते हैं और अपने असफलता का दोष दुसरे को या अपने कमजोरियों को देने लग जाते हैं, ‘चाहे हम रहे या आप’ हम सब यही करते हैं| हमारी संस्था ऐसे ही स्टोरी दुनिया से खोज कर निकालते हैं और हम सब के सामने लाना चाहते हैं, की भले शरीर कमजोर हो पर मन से चट्टान की तरह मजबूत होना चाहिए, तभी सफलता मिलती हैं| आज का कहानी, ऐसे ही इरादों से मजबूत मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला के बारे में हैं|
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लेख की खास बाते:

आखिर “मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला” कौन है?  उनके साथ क्या हुआ?  क्या हासिल किये?  उन्हें क्या सामान मिला? अभी वो क्या कर रही हैं? और अंत में उनकी विचार गाथा|
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*आखिर “मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला” कौन है?

मलाथी कृष्णमूर्ति होल्ला भारत के एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित किया गया हैं। 56 की उम्र में वह अभी भी व्हीलचेयर पर सबसे तेज़ महिला भारतीय एथलीट हैं।

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*उनके साथ क्या हुआ?

उनका जन्म 6 जुलाई 1968 को बैंगलोर में हुआ था। जब वह एक वर्ष की थी, तब मलाथी को बुखार ने लकवा मार दिया था। दो से अधिक वर्षों के लिए बिजली के झटके के उपचार ने उसके ऊपरी शरीर की ताकत में सुधार किया। मलाथी की अब तक 34 सर्जरी हो चुकी हैं।
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*क्या हासिल किये?  उन्हें क्या सामान मिला?

421 (389 गोल्ड, 27 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज) से अधिक पदक जीतकर मलाथी को भारत सरकार के द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन (1996 )और पद्म श्री (2001) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने दक्षिण कोरिया, बार्सिलोना, एथेंस और बीजिंग में आयोजित पैरालिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया; बीजिंग, बैंकॉक, दक्षिण कोरिया और कुआलालंपुर में आयोजित एशियाई खेलों; डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित विश्व मास्टर्स, ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेल और बेल्जियम, कुआलालंपुर और इंग्लैंड में ओपन चैंपियनशिप।
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*अभी वो क्या कर रही हैं?

वह सिंडिकेट बैंक में एक प्रबंधक(Manager) के रूप में काम करती है और 16 बच्चों को माथुर फाउंडेशन में विभिन्न विकलांगों के साथ आश्रय देती है - जो अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक charitable trust बनाई हैं। वह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के पोलियो पीड़ितों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिनके माता-पिता अपने बच्चे को स्कूल भेजने या चिकित्सा उपचार देने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।

उसने 8 जुलाई 2009 को अपनी first authorized biography book:"A Different Spirit"  लॉन्च की।



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*उनकी विचार:-

उनके पुस्तक से दो विचार:


“When I was small, I wanted to be first among my friends who used to run to the backyard to pick the fallen mangoes. I wanted to fly like a bird fearlessly from one place to another. But as I grew up I realized that you need legs to run and wings to fly. I was hurt, but I didn’t give up. I knew, one day, I would run…”

“Thus I took up sports and decided to do something different in life. Yes, we are different and so even our lives should be a shining example of that difference,”
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आपको यह लेख कैसा लगा हमे जरुर बताये|
धन्यवाद

आशीष बरनवाल



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