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Conflict Story: Arunima Sinha

Conflict Story #1: Arunima Sinha



Arunima Sinha's Video
#ArunimaSinha   #7_Rules_of_Life   #the_World's_first_female_amputee_to_scale_Mount_Everest
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लेख की खास बाते:

आखिर “अरुणिमा सिन्हा” कौन है?  उनके साथ क्या हुआ?  उसने क्या किया?  क्या हासिल किये?  उन्हें क्या सामान मिला? उनका सफलता का क्या नियम है? और अंत में उनकी विचार गाथा|
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आप सभी को आज की “रानी लक्ष्मीबाई” से मिलाने जा रहे हैं, वह हैं- “अरूणिमा सिन्हा”| अरूणिमा सिन्हा का जो संघर्ष है, आज पूरी दुनियां के लिए एक मिसाल हैं| उनकी जीवन परिचय से शरू करते हैं:-

*आखिर “अरुणिमा सिन्हा” कौन है?
अरूणिमा सिन्हा (जन्म: 1988, सुल्तानपुर, U.P.)  भारत से राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वालीबाल खिलाड़ी तथा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला हैं।

*उनके साथ क्या हुआ?
12 अप्रैल 2011 को लखनऊ से देहरादून जाते समय उनके बैग और सोने की चेन खींचने के प्रयास में कुछ अपराधियों ने बरेली के निकट पदमवाती एक्सप्रेस से अरुणिमा को बाहर फेंक दिया था, जिसके कारण वह अपना एक पैर गंवा बैठी थी।

*उसने क्या किया?
    चोरो के द्वारा चलती ट्रेन से फेंक दिए जाने के कारण एक पैर गंवा चुकने के बावजूद अरूणिमा ने गजब के जीवट का परिचय देते हुए 21 मई 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (29028 फुट) को फतह कर एक नया इतिहास रचते हुए ऐसा करने वाली पहली विकलांग भारतीय महिला होने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया।
     माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद अरुणिमा सिन्हा का अगला लक्ष्य सभी सात महाद्वीपों में सभी सात सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ना था। उसने छह चोटियों को कवर किया, यानी 2014 तक एशिया, यूरोप, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में। उसने माउंट को समिट किया। रूस के एल्बर्स (यूरोप) ऊंचाई 5,642 मीटर (18,510 फीट), प्रमुखता 4,741 मीटर (15,554 फीट) और तंजानिया के किलीमंजारो (अफ्रीका) ऊंचाई 5,895 मीटर (19341 फीट) और प्रमुखता 5,885 मीटर (19,308 फीट)। 4 जनवरी, 2019 को, वह अंटार्कटिका पर सातवें शिखर पर चढ़ गई और माउंट विंसन पर चढ़ाई करने वाली दुनिया की पहली महिला एंप्टी बन गई।

*क्या हासिल किये?
उन्हें कई अवार्ड से सम्मानित किया गया हैं:-
1. Padma Shri Award (2015)
2. Tenzing Norgay National Adventure Award (2015)
3. First Lady Award (2016)
4. Malala Award
5. Yash Bharti Award
6. Rani Laxmi Bai Award

*उनकी सफलता का क्या नियम है?
• अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाओ
• कभी हार मत मानो
• मेरे मन में सब कुछ
• आप जितना मेहनत करते हैं भाग्य आपको उतना ही देता है
• अपनी प्रेरणा स्वयं बनें
• जीवन में जोखिम उठाएं
• नए लक्ष्य न बनाएं

*उनकी विचार गाथाएं:- 
 “मंजिल मिल ही जाएगी भटकते हुए ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं।”

  "अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है,
  अभी तो इस परिंदे का इम्तिहान बाकी है।
  अभी अभी तो मैंने लांघा है समंदरों को,
  अभी तो पूरा आसमान बाकी है!!!"

"इंसान शरीर से विकलांग नहीं होता बल्कि मानसिकता से विकलांग होता है"।


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धन्यवाद
आशीष बरनवाल

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